गणतंत्र दिवस में राष्ट्रीय कवियों ने कविताओं से सजाई महफ़िल अजयश्री फाउंडेशन के साथ

देहरादून। अजयश्री फाउंडेशन ने गणतंत्र दिवस के अवसर में दो सत्रों में कार्यक्रम आयोजित किया। सुबह के सत्र में अजयश्री फाउंडेशन ने सांस्कृतिक कार्यक्रम किया बच्चों संग जिसमें नन्हीं कली ओजस्वनी डोगरा ने बहुत सुन्दर नृत्य और गायन ने कार्यक्रम में समा बांध दिया। कार्यक्रम दूसरा सत्र सांय को राष्ट्रीय स्तरीय कवि सम्मेलन के साथ हुआ । कवि सम्मेलन को वर्चवली रखा गया। जिसमें कवयत्री मणिका मणि अग्रवाल की सरस्वती वंदना से आगाज हुआ। इसके बाद मणिका ने
मूँद स्वयं की आँखों को जो
सोचोगे सब ठीक रहेगा।
भावी हिंदुस्तान तुम्हें फिर,
निश्चित ही मतिहीन कहेगा।। ……मणिका मणि अग्रवाल की इस शानदार प्रस्तुति ने कवि सम्मेलन में सभी सरहाया।

कवयित्री कविता बिष्ट ने

अब तो लहरायेगी मेरे
देश की चुनर धानी
हर दिल वहां मुस्कुराएगा
लेकर स्वछंद हवा-पानी
~कविता बिष्ट । कविता सुनाकर देश प्रेम की अलख जगा दी।

महिमा श्री ने देशभक्ति गीत को वीर रस कविता बहुत पसंद की गई दर्शकों के द्वारा

हम वीर सपूत है भारत के ना पीछे कदम हटाएंगे
शत्रु के शोणित से ही अपने माथे पर तिलक लगाएंगे
ना आंच कभी आने देंगे हम माता तेरे आंचल पर
हुनकारेंगे समरांगण में शत्रु को मार भगाएंगे

महिमा “श्री”

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जाने माने कवि एवं गीतकार श्रीकांत श्री ने कवि सम्मेलन कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से वर्चवली नई पीढ़ी से जुड़ सकते हैं। श्रीकांत श्री के वीर रस के गीत दर्शकों द्वारा बहुत पसंद किए गए।
आओ करे प्रणाम उन्हें हम जिनसे ये गणतंत्र,
बलिवेदी पर खुद को वारा तब ये पाया तंत्र ।
जय बोलो भारत मां की , जय बोलो भारत मां की …
भारत मां की जय जय जय हो एक ही स्वप्न हमारा,
विश्व गुरु हो देश हमारा इसलिए जीवन वारा ,
जय भारत जय जय जय भारत अपना एक ही मंत्र …
बलिवेदी पर खुद को वारा तब ये पाया तंत्र …
जय बोलो भारत मां की ….
श्री श्री कांत “श्री”

कार्यक्रम की आयोजक एवं संचालक रही विजयश्री वन्दिता ने शब्द द्रोण हो गए गीत सुनाया । अंत मे विजयश्री वन्दिता ने अजयश्री फाउंडेशन की तरफ से सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम लाइव प्रसारण अजयश्री टाइम्स फेसबुक पेज में किया गया।

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