*जयपुर: डोल का बाढ़ जंगल की कटाई के ख़िलाफ़ उठी जन-आवाज़, हजारों लोगों ने दायर की ऑनलाइन पेटिशन*

जयपुर, 25 जुलाई 2025 | रिपोर्टर: अजयश्री टाइम्स डेस्क
जयपुर के हरे-भरे और शहरी पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण “डोल का बाढ़” जंगल एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। राजस्थान इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (RIICO) द्वारा इस क्षेत्र में प्रस्तावित विकास परियोजनाओं — PM Unity Mall, Fintech Park और राजस्थान मंडपम — के लिए लगभग 2,400 से 2,500 पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव रखा गया है। यह खबर सामने आते ही पूरे जयपुर सहित देशभर के पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश फैल गया है। क्या है डोल का बाढ़?
जयपुर एयरपोर्ट से सटे लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में फैला यह हरित क्षेत्र, वर्षों से स्थानीय जैवविविधता का घर रहा है। यहाँ खेजड़ी सहित अनेक देशी प्रजातियों के पेड़ हैं और यह क्षेत्र पक्षियों, छोटे जीव-जंतुओं और प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र है।जनता ने उठाई आवाज़
पर्यावरण कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों ने जंगल की कटाई के विरुद्ध एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। Change.org पर शुरू की गई एक ऑनलाइन पिटीशन में अब तक 53,000 से अधिक हस्ताक्षर एकत्रित हो चुके हैं। हाल ही में एक नई पिटीशन भी शुरू हुई है, जिसमें लोग एक बायोडायवर्सिटी पार्क की माँग कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि,
“विकास जरूरी है, लेकिन पेड़ों की कीमत पर नहीं। सरकार को चाहिए कि वो परियोजना के लिए वैकल्पिक बंजर भूमि का चयन करे।” राजनेताओं की प्रतिक्रिया
आप सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस कटाई को रोके जाने की माँग की है। उन्होंने इसे “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी पर्यावरणीय मुहिमों के विपरीत बताया। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी युवाओं द्वारा आयोजित धरनों का समर्थन करते हुए सरकार से संवाद की अपील की है।
धरना और पुलिस कार्रवाई
बीते दिनों पर्यावरण प्रेमियों ने सड़क किनारे धरने लगाए, जिनमें पुलिस हस्तक्षेप और गिरफ्तारी जैसी घटनाएं भी सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी आवाज़ को दबा रहा है, जबकि वे शांतिपूर्ण ढंग से जंगल को बचाने की माँग कर रहे हैं।
आँकड़ों में पर्यावरणीय खतरा
बिंदु: विवरण
क्षेत्र का नाम: डोल का बाढ़, जयपुर
कुल क्षेत्रफल: लगभग 100 एकड़
कटने वाले पेड़ों की संख्या: लगभग 2,400–2,500
प्रमुख प्रजातियाँ: खेजड़ी, नीम, बबूल आदि
वर्तमान उपयोग: हरित क्षेत्र, पक्षीवास, कार्बन सिंक
प्रस्तावित उपयोग: मॉल, पार्क, कॉन्फ्रेंस हॉल, यूनिटी मॉल
सवाल उठता है…
जयपुर जैसे तेजी से शहरीकरण वाले शहरों में जब शुद्ध हवा और हरियाली पहले ही कम होती जा रही है, तब आख़िरी बचे हुए शहरी जंगल को भी विकास की भेंट चढ़ाना कितना उचित है

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