लेखिका, गीतकार  एवं मोटीवेशनल स्पीकर चित्रा विशाल श्रीवास्तव

 

लेखिका, गीतकार एवं मोटीवेशनल स्पीकर चित्रा विशाल श्रीवास्तव(पिता- श्री राघवेन्द्र बहादुर ‘सरल’ और माता- श्रीमती सरला श्रीवास्तव) जी का जन्म पावन धरती प्रयागराज में हुआ जिसका बड़ा ही ऐतिहासिक महत्व है।प्रयागराज बहुत से कार्यों और कारणों से जाना जाता है उन महत्वपूर्ण कारणों में एक कारण है लेखन।इस धरती को लेखक और कवियों का गढ़ कहते हैं।

चित्रा जी ने आई ई आर टी प्रयागराज से मेकैनिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की है और पंजाब से शास्त्रीय गायन में प्रभाकर किया है।

बचपन से ही चित्रा जी की लेखन में रूची रही।यह प्रतिभा उन्हें अपने पिता द्वारा ही प्राप्त हुई।इनके पिताजी स्वयं अच्छे कवि और गीतकार हैं।

 

चित्रा जी के लेखन की दूसरी पारी में पहली पुस्तक प्रकाशित हुई ‘भाव प्रेम के’ जो कि अवधी और खड़ी बोली का मिश्रण है।चित्रा जी उभरते हुए नये हिंदी लेखक और लेखिकाओं में अपना बनाने की ओर सुंदर प्रयास कर रही हैं।हिंदी लेखन में इनका योगदान सराहनीय रहेगा। 

पुस्तक ‘भाव प्रेम के’ अपने नाम के अनुसार भावनाओं के हर रंग से सजी हुई है।इसमें द्वापर युग की कुछ घटनाओं पर, वात्सल्य,ठिठोली तथा राधा कृष्ण संयोग-वियोग पर सुंदर गीत हैं।

इस पुस्तक को काफी पसंद किया जा रहा है।देश ही नहीं विदेशों में भी इसके पाठक है।

 

चित्रा जी की दूसरी पुस्तक ‘प्रीति प्रवाहिनी’ जो कि २४ नवंबर २०२२ को अमेजन पर प्रकाशित हुई है।यह चंपू काव्य के जैसा लेखन है।यह गद्य और पद्य का अद्भुत मिश्रण है।यह पुस्तक वैचारिकी है, लेखन का मूल भाव प्रेम है।

 

प्रेम, प्रेम का भाव और प्रेमाआनंद क्या है यही इस पुस्तक में लेखिका के द्वारा प्रस्तुत करने सुंदर प्रयास किया गया है।

 

चित्रा जी की तीसरी पुस्तक पर भी कार्य चल रहा है वह भी जल्द ही प्रकाशित होगी।

इनका फेसबुक पेज भी है जिसका नाम ‘मै नैया पतवार प्रभु जी’ है।यू ट्यूब चैनल:Chitra Vishal Srivastava ।

 

चित्रा जी की दोनों पुस्तकें (भाव प्रेम के एवॅं प्रीति प्रवाहिनी)अमेजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं।

चित्रा जी के उज्ज्वल भविष्य की हम कामना के साथ इनकी पुस्तक ‘प्रीति प्रवाहिनी’ के लिए अजय श्री टाइम्स की ओर से हार्दिक शुभकामनाऍं।

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