मुंड मा आग /पीठ पर पाड़ बी मोहन को समर्पित नरेंद्र कठैत की अद्भुत रचना

मुंड मा आग /पीठ पर पाड़ गढवाली भाषा का एक ऐसा ग्रन्थ है जो राष्ट्रीयता को लोक से जोड़ता है। गढवाली भाषांतर साहित्य में यह काम अपने तरह का अभिनव साहित्यिक काम है। गढवाली भाषा मे पहली बार कोई ऐसा ग्रन्थ आया है जिसमे हिंदी साहित्य के मुख्य 136 कवियों का सुमिरन करते हुए उनकी कविताओं का गढवाली शक्ल देने काम किया गया है साहित्यकार नरेंद्र कठैत द्वारा। गढवाली भाषा मे और हिंदी भाषा साहित्य का अद्भुत संवाद का प्रयास इस पुस्तक द्वारा किया गया है। साहित्यकार नरेंद्र कठैत ने पत्र पत्रिका पुस्तकें अलग अलग संकलनो में छपी कविताओं को गढवाली रूप रंग देकर क एक साथ लाने प्रयास किया है। इस गढवाली अनुवाद पुस्तक की एक विशेषता यही भी रही इसमें दुर्लभ पत्र पत्रिका और काव्य संकलनों और ग्रन्थो से कवितायें ली गयी है इस बात से पता चलता है यह किताब बस अनुवादक की एक कृति भर नही उसके जीवन की अध्य्यन यात्रा का भी एक दर्शन है। पुस्तक में बालकवि बैरागी ,कबीर ,सूरदास , मीरा ,अमीर खुसरो नरोत्तमदास जैसे भक्तकवियों की कविता हैं तो वहीं,रविन्द्रनाथ टैगोर , साहिर लुधियानवी से लेकर आज कालजयी आधुनिक कवियों की समकालीन कविताओं को गढवाली रूप रंग दिया है।। पुस्तक में भूमिका शाक्त ध्यानी की है ,पुस्तक में आवरण चित्र एवं स्केच चित्र चित्रकार एवं साहित्यकार सन्दीप राशिनकर के रहे। पुस्तक में अनुवाद से जुड़ी कविताओं में चित्रकार बी मोहन नेगी के कविता पोस्टर को भी स्थान दिया गया अंत मे।यह पुस्तक समर्पित भी चित्रकार बी मोहन नेगी को  है ।जिसमे नरेंद्र कठैत लिखते भी गढवाली कविता को एक रंग और रेखाओं से आसमान देने वाले अमर चित्रकार बी मोहन नेगी को समर्पित। साहित्यकार नरेंद्र कठैत की तीसरी कृति है जो बी मोहन  नेगी को समर्पित है इससे पूर्व स्मृति ग्रन्थ और जीवन दर्शन  भी प्रकाशित है बी मोहन नेगी पर  । रावत डिजिटल पब्लिसिंग हाउस गाजियाबाद उत्तर प्रदेश से यह पुस्तक प्रकाशित है। जिसका बाजार मूल्य 250.00 है। गढ़वाली साहित्य के लिए यह कृति दिशा दशा देने कार्य करेगी।

समीक्षा : शैलेन्द्र जोशी

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