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पैसों वाले पर्व मनाएँ, निर्धन देखें जेबें खाली। क सोचे क्या-क्या ले आऊँ, इक सोचे जाती कंगाली।।

पैसों वाले पर्व मनाएँ, निर्धन देखें जेबें खाली।इक सोचे क्या-क्या ले आऊँ, इक सोचे जाती कंगाली।। रिझा रहे लक्ष्मी से,…

5 years ago