#Hindi poem#kamlesh Kamal

नाज़ुक-रिश्ते [कविता©कमलेश कमल]

नाज़ुक-रिश्ते [कविता©कमलेश कमल] ********************** नाज़ुक रिश्ते आज के गहरे अर्थ के तार संभल-संभल पग राखिए क्या पूजा-घर, क्या प्यार सूना…

4 years ago

आदिम प्रेम {बस्तर केंद्रित कविता–©कमलेश कमल}

आदिम प्रेम {बस्तर केंद्रित कविता–©कमलेश कमल} ********************************* सिर पर गुलाबी रिबन बाँधती माँ ने एक राजकुमार का चित्र गढ़ा था…

4 years ago