अगर किसी पुस्तक का लेखक तीस पैंतीस चालीस हजार तक तीन सौ या पांच सौ प्रति निकालकर सप्रेम भेंट ही समाज को दे रहा है तो वो ऐसे प्रकाशको की दुकान ही तो चला रहा बिना बाजार प्रबंधन के अभाव में
अगर किसी पुस्तक का लेखक तीस पैंतीस चालीस हजार तक तीन सौ या पांच सौ प्रति निकालकर सप्रेम भेंट ही समाज को दे रहा है तो वो ऐसे प्रकाशको की…

