*तन*बासंती*मन*बासंती*प्रियतम*का*संदेश*करे*है*
महिला काव्य मंच की मासिक काव्यगोष्ठी में जम कर बिखरे बासंती रंग
जय माँ शारदे🌹
“महिला काव्य मंच” (मन से मंच तक) देहरादून इकाई के तत्वावधान में फरवरी माह की मासिक काव्य गोष्ठी 27 फरवरी दिन रविवार 2022को (ऑनलाइन) संम्पन हुई।
जिला अध्यक्ष निशा”अतुल्य” जी ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। प्रन्तीय अध्यक्ष डॉ. विद्या सिंह जी गोष्ठी की मुख्य अतिथि एवं डॉ. आशा रावत’ जी विशिष्ट अतिथि रहीं। संचालन जिला महामंत्री मणि अग्रवाल”मणिका” द्वारा किया गया।
गोष्ठी शोभा पाराशर जी की सुंदर वाणी वंदना “माँ शारदे को मनाएँगे” से आरंभ हुई तत्पश्चात ऋतु थपलियाल जी ने बहुत ही भावपूर्ण रचना ” मेरी उम्मीदों के परिंदे भीतर के घरोंदो में रहते हैं” का सुंदर वाचन किया ऋतु जी के बाद कविता बिष्ट जी ने “मोहब्बत ही तो जीवन का आधार है ” जैसी खूबसूरत रचना से शृंगारिक रंग बिखेरा तो कुसुम पंत जी ने भक्तिरस से परिपूर्ण रचना ” शिवजी मुझको जटा में ध्यायें” सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध किया।अमृता पांडे जी ने युद्ध की विभीषिका पर अंतर्मन को झकझोरने वाली रचना “बारूद का ढेर खड़ा कर उसे हवा देने वाले लोग” सुनाकर सभी को सोचने पर विवश कर दिया। रेखा जोशी जी की रचना ” खोला जब मैंने धर्म का खाता” को भी सभी ने खूब पसंद किया। नीरू जी ने बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ” नाम रब का लिखा करे कोई” पढ़ी तो सभी झूम उठे। झूमने का ये सिलसिला डॉ. सुहेला अहमद जी की ग़ज़ल ” मैं तो सुर हूँ रागे मोहब्बत छोड़ जाऊँगी” के पूरा होने तक निरन्तर बना रहा।
नीरू नीलोफर जी की संदेशपरक रचना ” बेहद नाजुक से होते हैं यह रिश्ते रखना इन को संभाल कर” सुनकर सभी ने दिल खोल कर सराहना की। प्रो.उषा झा “रेणु”जी ने सारगर्भित रचना “विरल वन में मुस्कुराता
मद में चूर मैं वृक्ष खजूर” सुनाकर सभी की वाह-वाही लूटी तो निकी पुष्कर जी की बेहद खूबसूरत ग़ज़ल “हर मसर्रत मेरे दिल की कोई कहती है ग़ज़ल” सुनाकर समां बाँध दिया। डॉ. इंदु अग्रवाल जी की रचना ” दिए की लौ थपेड़ों से लड़ाई आम करती हैं” ने सभी को खूब प्रभावित किया । वहीं डॉ. नूतन डिमरी जी की रचना “कल ही जरा सी बड़ी हुई बेटियां जब बात करती हैं सोलो ट्रैकिंग की” सुनकर सभी भावविभोर हो उठे।
मणि अग्रवाल ” मणिका के बासंती गीत” तन बसंती मन बसंती प्रियतम का संदेश करे है ” की भी सबने जमकर तारीफ़ की। अफ्शा के बेहतरीन मिसरे “जो थी फूलों की शाख सी लड़की अब तो पतझड़ सी है” सुनकर सभी आनंदित हुए। विशिष्ट अतिथि डॉ. आशा रावत जी ने ” महसूस करो दर्द थोड़ी और शिद्दत से” एवं ” मेरी अमानतें तुम्हारे पास गिरवी है तुम्हारी अमानतें मेरे पास गिरवी हैं” जैसी उत्कृष्ट रचनाएँ सुनाकर सभी को अभिभूत किया इसके पश्चात मुख्य अतिथि डॉ. विद्या सिंह जी का बेहद खूबसूरत गीत ” प्रेम की बस्ती के बाशिंदे हम नफरतों से हमें क्या काम भला?” सभी के दिल में उतर गया। गोष्ठी का अंत में विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य अतिथि के आशीर्वचनों से सभी कृतार्थ हुए। सम्माननीया अध्यक्ष निशा “अतुल्य” जी ने प्रथम बहुत सुंदर रचना ” आया पतझड़ पात गिरा था डाल-डाल संताप करे” सुनाकर गोष्ठी में काव्य का एक और रंग भरा पश्चात प्रेरक उद्बोधन के द्वारा सभी को प्रोत्साहित किया एवं साभार गोष्ठी की पूर्णता की घोषणा की।
मणि अग्रवाल “मणिका”
जिला सचिव, महिला काव्य मंच
देहरादून इकाई।
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