स्पेस सेक्टर में ऐतिहासिक क्रांति: अब खुद रॉकेट नहीं बनाएगा ISRO, निजी कंपनियों और PSUs को सौंपी कमान

बेंगलुरु, 22 अगस्त 2026। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश के स्पेस सेक्टर को लेकर एक बेहद बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है। इसरो अब खुद सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (रॉकेट) का निर्माण और असेंबलिंग नहीं करेगा। संगठन ने यह जिम्मेदारी पूरी तरह से देश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और निजी क्षेत्र की प्राइवेट कंपनियों को सौंपने का निर्णय लिया है। इस कदम को भारतीय स्पेस इंडस्ट्री के इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
इसरो के शीर्ष कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री एस. सोमनाथ और श्रीमती वी. आर. ललितांबिका जैसे वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में इस नई नीति को अंतिम रूप दिया गया है। इसरो के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, संगठन का मुख्य उद्देश्य शुद्ध अनुसंधान (Research) और विकास (Development) है। रॉकेट के बार-बार निर्माण और कमर्शियल लॉन्चिंग के रोजमर्रा के कामों में व्यस्त रहने के कारण वैज्ञानिकों का काफी समय और संसाधन उसमें लग जाते थे। अब इस जिम्मेदारी को ट्रांसफर करने के बाद, इसरो के वैज्ञानिक अपना पूरा फोकस उन्नत तकनीक (Advanced Technology), अगली पीढ़ी के क्रायोजेनिक इंजनों, पुनः उपयोग होने वाले (Reusable) स्पेस क्राफ्ट्स के विकास, गहरे अंतरिक्ष की खोज, आगामी शुक्र मिशन (Shukrayaan) और मानवयुक्त गगनयान मिशनों को और एडवांस बनाने पर लगाएंगे। इसके साथ ही ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को खोजने के लिए नए उपकरणों और उपग्रहों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
इस बड़े फैसले से भारत के प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप्स और बड़ी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए बिजनेस के नए दरवाजे खुलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र के आने से रॉकेट निर्माण की रफ्तार कई गुना तेज होगी और बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से लॉन्चिंग की लागत में कमी आएगी। इसके परिणामस्वरूप भारत दुनिया भर के देशों के लिए व्यावसायिक सैटेलाइट लॉन्च करने का सबसे बड़ा और सस्ता ग्लोबल हब बनकर उभरेगा। रॉकेट निर्माण से पीछे हटने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इसरो की अहमियत कम होगी। इसरो अब एक ‘गाइड’ और ‘रिसर्च बॉडी’ के रूप में काम करेगा। वह निजी कंपनियों को रॉकेट बनाने की तकनीक (Technology Transfer) ट्रांसफर करेगा, उनकी क्वालिटी की निगरानी करेगा और केवल सबसे महत्वपूर्ण व संवेदनशील मिशनों की कमान अपने हाथ में रखेगा।
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