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झालावाड़: सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत, दर्जनों घायल

झालावाड़: सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत, दर्जनों घायल
झालावाड़, 25 जुलाई 2025 | रिपोर्टर: अजयश्री टाइम्स डेस्क
राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय की एक कक्षा की छत शुक्रवार की सुबह करीब 8:30 बजे अचानक गिर गई, जिसमें कम से कम 7 बच्चे मारे गए और 27–29 बच्चे घायल हुए, जिनमें से कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
हादसा कैसे हुआ?
घटना के समय छात्र प्रार्थना सभा में शामिल हो रहे थे जब छत का हिस्सा अचानक नीचे गिर गया — जिनमें से कुछ गिरते पत्थरों का संदेह पहले ही जताया गया था, पर उन्हें अनसुना कर दिया गया था। घटना में लगभग 35 छात्र कक्षा में मौजूद थे; मलबे के नीचे कई बच्चों को दबा पाया गया, जिन्हें ग्रामीणों और बचाव दल के सहयोग से निकाला गया।
राहत और बचाव कार्य
ग्रामीणों, स्कूल कर्मचारियों और प्रशासन की टीम ने मिलकर बचाव अभियान चलाया; घटना स्थल पर जेसीबी मशीनों की सहायता से मलबा हटाया गया। इलाज हेतु घायल बच्चों को मनोहरथाना अस्पताल में भर्ती कराया गया; जिनमें से कई को ICU में स्थानांतरित किया गया; 5–6 बच्चों की मौत मौके पर, बाकी गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती।
प्रशासन और राजनीतिक प्रतिक्रिया
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया और उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जिम्मेदारी स्वीकार की और बताया कि 5 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। मानवाधिकार आयोग ने मामले को संज्ञान में लेते हुए 7 दिनों के भीतर एक्शन रिपोर्ट की मांग की है।
चूक का बड़ा खुलासा
भवन की मरम्मत के लिए ₹4.28 करोड़ का बजट पहले ही स्वीकृत था, लेकिन यह वित्त विभाग में अटका हुआ था; परिणामस्वरूप, इमारत मरम्मत हेतु नहीं बनी। कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि यह स्कूल ‘जर्जर भवन’ सूची में शामिल नहीं था, इसलिए उस पर कोई विशेष कार्रवाई नहीं हुई थी।
आँकड़ों में प्रस्तुत तथ्य
स्थान: पिपलोदी गांव, मनोहरथाना ब्लॉक, झालावाड़ जिला
घटना की समयावधि: 25 जुलाई 2025, सुबह लगभग 8:30 बजे
मौजूद छात्र संख्या: लगभग 35
मृत बच्चों की संख्या: 7
घायल बच्चों की संख्या: लगभग 27–29, कुछ की स्थिति गंभीर
मरम्मत हेतु बजट: ₹4.28 करोड़ (अविकसित)
सस्पेंड किए गए शिक्षक: 5
जांच-अधिकार: उच्च स्तरीय और मानवाधिकार आयोग द्वारा
निष्कर्ष
यह दुर्घटना शिक्षा विभाग की लापरवाही, जर्जर भवन सूची में स्कूल का अभाव, और प्राथमिक चेतावनियों के बावजूद कार्रवाई न होना जैसी त्रुटियों की गंभीर मिसाल है। इस घटना ने साफ़ कर दिया कि न केवल बजट की मंजूरी, बल्कि समय पर आधिकारिक कार्रवाई भी ज़रूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
अजयश्री टाइम्स, जनहित की हर आवाज़ के साथ।

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