देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन, मुख्यमंत्री धामी ने की माँ वाराही की पूजा-अर्चना
चम्पावत। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। मेले में आस्था, परंपरा, लोक संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेले में प्रतिभाग कर माँ वाराही देवी की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
देवीधुरा हेलीपैड पहुंचने पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक लोकनृत्य छोलिया की मनमोहक प्रस्तुति के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माँ वाराही मइया सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। उन्होंने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बग्वाल मेले को उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी उद्देश्य से मानसखंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में विगत पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना एवं सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य शीघ्र कराया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपनी समृद्ध लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने विकास भी और विरासत भी के संकल्प को दोहराया।
मुख्यमंत्री ने चार खाम-सात थोक के बीच खेले जाने वाले अनोखे प्राचीन पाषाण युद्ध का भी अवलोकन किया। रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बालिकाओं एवं महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया।
माँ वाराही मंदिर में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चारों खाम वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया के बग्वालियों का प्रवेश हुआ। अलग-अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्रों एवं पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं।
शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल का शुभारंभ हुआ। फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान माँ के जयकारों से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ वाराही मइया सबकी चिंता करती हैं। उन्होंने कहा कि यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। यहां की परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, जहां बग्वाल के बाद सभी योद्धा एक-दूसरे से गले मिलते हैं।
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