डिजिटल क्रांति: गृह मंत्रालय ने लॉन्च किए 4 नए पुलिसिंग ऐप, 35 सेकंड में खुलेगी अपराधियों की कुंडली
नई दिल्ली, 24 जून 2026
भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली को पूरी तरह से हाईटेक और पेपरलेस बनाने की दिशा में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सुरक्षा, सर्विलांस और जांच प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए चार उन्नत (Advanced) डिजिटल पुलिसिंग एप्लीकेशन्स लॉन्च किए हैं। ये चारों ऐप्स ‘इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम’ (ICJS) के तहत काम करेंगे, जो पुलिस, फॉरेंसिक, जेल और अदालतों को एक ही डिजिटल धागे में पिरो देगा।
इस डिजिटल पुलिसिंग का सबसे बड़ा हथियार ‘NCRB-Abhigyan’ (अभिज्ञान ऐप) को माना जा रहा है। अब गश्त या नाकाबंदी के दौरान पुलिसकर्मियों को संदिग्धों की पहचान के लिए थानों के चक्कर नहीं काटने होंगे। पुलिसकर्मी अपने स्मार्टफोन में एक छोटा बायोमेट्रिक स्कैनर जोड़कर ऑन-द-防pot संदिग्ध का फिंगरप्रिंट ले सकेंगे। यह ऐप सीधे नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) से जुड़ा है, जिसके डेटाबेस में 1.3 करोड़ से अधिक अपराधियों का रिकॉर्ड दर्ज है। उंगली रखते ही मात्र 35 सेकंड के भीतर अपराधी का पूरा काला चिट्ठा पुलिस के मोबाइल स्क्रीन पर होगा।
पहचान की इस प्रक्रिया को और अचूक बनाने के लिए ‘CrPI Application’ (क्रिमिनल प्रोसीजर आइडेंटिफिकेशन) को उतारा गया है। इसके जरिए अब पुलिस केवल फिंगरप्रिंट तक सीमित नहीं रहेगी। अपराधियों के चेहरे की पहचान (Facial Recognition), आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग (Iris Matching) और डीएनए (DNA) प्रोफाइलिंग को एक साथ जोड़ा जा सकेगा। इससे अपराधियों के लिए फर्जी नाम या हुलिया बदलकर बचना नामुमकिन हो जाएगा।
अक्सर अदालतों में केस सबूतों की कमी या फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी के कारण लटक जाते हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए ‘e-Forensics 2.0’ और ‘e-Prosecution 2.0’ को पेश किया गया है। ‘ई-forensics’ के जरिए क्राइम सीन से सबूत उठाने से लेकर लैब की रिपोर्ट आने तक की हर प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ का खतरा शून्य हो जाएगा। वहीं, सरकारी वकीलों के लिए बने ‘ई-प्रॉसीक्यूशन’ ऐप से चार्जशीट, गवाहों के समन और कोर्ट की तारीखों की लाइव मॉनिटरिंग होगी, जिससे अदालती कार्यवाही की रफ्तार दोगुनी हो जाएगी।
1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए क्रिमिनल कानूनों (भारतीय न्याय संहिता) में तकनीकी साक्ष्यों को प्राथमिकता दी गई थी। जानकारों का मानना है कि जून 2026 में लॉन्च किए गए ये चार ऐप्स उन कानूनों को जमीन पर उतारने के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होंगे। इससे न सिर्फ पुलिस का काम आसान होगा, बल्कि आम जनता को भी पारदर्शी और त्वरित न्याय मिल सकेगा।
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