देहरादून।अजयश्री फाउंडेशन के स्थापना दिवस के अवसर पर 26 दिसंबर 2025 को आयोजित सांस्कृतिक-साहित्यिक समारोह ‘साझा विरासत – वाइस ऑफ होप’ ने कला, संवेदना और सामाजिक संवाद का प्रभावशाली मंच प्रदान किया। इस आयोजन ने नई और अनुभवी पीढ़ी को एक साथ जोड़ते हुए उभरती प्रतिभाओं को अपनी अभिव्यक्ति की सशक्त आवाज़ दी।
कार्यक्रम का उद्देश्य “प्रतिभा को पहचान, समाज को दिशा और विरासत को सम्मान” देना रहा। मंच पर कविता, गीत, नृत्य और भावनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से संघर्ष, सांस्कृतिक विरासत और भविष्य की उम्मीदों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. निवेदिता झा (संस्थापक एवं अध्यक्ष, कवच फाउंडेशन) रहीं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी श्रीकांत एवं शिक्षाविद्-प्रधानाचार्य भावना उपमन्यु उपस्थित रहीं।
अजयश्री फाउंडेशन के संरक्षकगण — डॉ. विद्या सिंह, अनिल अग्रवाल, डॉ. इंदु अग्रवाल एवं मोहम्मद इक़बाल आज़र — की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को नैतिक बल और प्रेरणात्मक ऊर्जा प्रदान की।
कला एवं साहित्य की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन वरिष्ठ कवि जसवीर सिंह हलदार एवं वरिष्ठ कवि वीरेंद्र डंगवाल ‘पार्थ’ द्वारा किया गया। जूरी सदस्य के रूप में श्रीमती कविता बिष्ट (संस्थापक एवं अध्यक्ष, जीवन्ती देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था) तथा श्रीमती कुसुम पंत (कवयित्री एवं समाजसेवी) मौजूद रहीं।
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन न केवल प्रतिभाओं को मंच देते हैं, बल्कि समाज में संवाद, संवेदना और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा भी तय करते हैं।
अजयश्री फाउंडेशन की संस्थापक विजयश्री वंदिता ने कहा,
“हम उन आवाज़ों के साथ खड़े हैं जिन्हें सुने जाने की ज़रूरत है। ‘साझा विरासत – वाइस ऑफ होप’ का उद्देश्य हर प्रतिभा को मंच, हर सपने को विश्वास और हर इंसान को उम्मीद देना है।”
कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के सम्मान, अतिथियों के आशीर्वचनों और समाज के लिए नए संकल्पों के साथ हुआ।
‘साझा विरासत – वाइस ऑफ होप’ ने यह संदेश दिया कि —
जहाँ आवाज़ें मिलती हैं, वहीं से उम्मीद जन्म लेती है, और उम्मीद ही परिवर्तन की पहली सीढ़ी है।


